वर्ष 2003 से, भारतीय मौसम विभाग पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मौसमी (जून-सितंबर) वर्षा के लिए दो चरणों में परिचालन दीर्घावधि पूर्वानुमान (एलआरएफ) जारी कर रहा है। पहले चरण का पूर्वानुमान अप्रैल में जारी किया जाता है और दूसरे चरण या अद्यतन पूर्वानुमान मई के अंत तक जारी किया जाता है। मुख्य बिंदु 2025 के दौरान पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) सामान्य से अधिक ( दीर्घ अवधि औसत (एलपीए) का 104 प्रतिशत से अधिक) वर्षा होने की संभावना है। मात्रात्मक रूप से, पूरे देश में मौसमी वर्षा ± 5 प्रतिशत की मॉडल त्रुटि के साथ एलपीए का 105 प्रतिशत होने की संभावना है। 1971-2020 की अवधि के लिए पूरे देश में मौसमी वर्षा का एलपीए 87 सेमी है । वर्तमान में, भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तटस्थ अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की स्थिति व्याप्त है। हालांकि, वायुमंडलीय परिसंचरण की विशेषताएं ला नीना की स्थितियों के समान हैं। नवीनतम मॉनसून मिशन जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली (एमएमसीएफएस) के साथ-साथ अन्य जलवायु मॉडल पूर्वानुमान संकेत देते हैं कि मॉनसून के मौसम के दौरान तटस्थ ईएनएसओ की स्थिति जारी रहने की संभावना है। वर्तमान में, हिंद महासागर के ऊपर तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) स्थितियां मौजूद हैं और नवीनतम जलवायु मॉडल पूर्वानुमान से संकेत मिलता है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम के दौरान तटस्थ आईओडी स्थितियां जारी रहने की संभावना है। पिछले तीन महीनों (जनवरी से मार्च, 2025) के दौरान उत्तरी गोलार्ध और यूरेशिया के बर्फ कवर क्षेत्र सामान्य से कम थे। उत्तरी गोलार्ध के साथ-साथ यूरेशिया में सर्दियों और वसंत के दौरान बर्फ पड़ने का विस्तार आम तौर पर बाद के भारतीय ग्रीष्मकालीन मॉनसून वर्षा के साथ विपरीत सम्बंध रखता है। मौसम विभाग मई 2025 के अंतिम सप्ताह में मॉनसून के लिए अद्यतन पूर्वानुमान जारी करेगा। मौसम विभाग का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2025 के लिए दीर्घ अवधि वाला पूर्वानुमान